Danteshwari Special Holi 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में शक्तिपीठ मां दंतेश्वरी मंदिर में राख से होली खेली जाती है.यह परंपरा 700 साल पुरानी है. लेकिन आज भी यह परंपरा बहुत उत्साह के साथ निभाई जाती है.
सभी देवी- देवताओं को भी राख की होली चढ़ाई जाती है.होली के पर्व की पूर्व संध्या को ताड़ के पत्तों से होलिका दहन किया जाता है. इन्हीं ताड़ के पत्तों की राख से सुबह पुजारी और ग्रामीण होली खेलते हैं. पलाश के फूलों से बना गुलाल भी देवी -देवताओं को लगाया जाता है.
आम तौर पर लकड़ियों और गोबर के बने कंडों से होली जलाने की मान्यता है, लेकिन दंतेवाड़ा में केवल ताड़ के पत्तों से ही होली जलाई जाती है. अगले दिन उसकी राख इकट्ठा कर दंतेश्वरी देवी के सामने रखकर होली खेली जाती है.
कहा जाता है कि ताड़ के पत्ते की राख से फागुन मंडई मेले में पहुंचने वाले सभी देवी देवता और पुजारी होली खेलते हैं. राख के अलावा ग्रामीण होली खेलने में पलाश फूल से तैयार गुलाल का भी इस्तेमाल करते हैं. यह अनोखी परंपरा केवल दंतेवाड़ा में ही देखने को मिलती है.
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